डॉ. हिमांशु ऐरन को भावपूर्ण सम्मान, नए राष्ट्रीय दायित्व की ओर प्रस्थान
-फूल-मालाओं से सजी गरिमामयी विदाई, कुलपति से लेकर छात्रों तक हर दिल हुआ भावुक—18 महीनों की प्रेरणादायक यात्रा को सलाम
देहरादून/तहलका न्यूज़18
देहरादून। डॉ. हिमांशु ऐरन ने जब अपने हृदय की गहराइयों से निकले शब्दों में कहा— “मेरा हृदय आपके दिए सम्मान से अभिभूत है… जय हिन्द, जय सुभारती!” — तो पूरा सभागार भावनाओं से भर उठा। राष्ट्रीय दंत आयोग में पूर्णकालिक सदस्य असेसमेंट & रेटिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे डॉ. ऐरन को रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय परिवार ने एक भव्य, गरिमामयी और भावभीनी विदाई दी।

कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सुसज्जित वातावरण में हुआ, जहाँ विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग, संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मंच पर पहुंचते ही डॉ. ऐरन का स्वागत फूल-मालाओं से लादकर किया गया—यह दृश्य उनके प्रति स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का जीवंत प्रतीक बन गया। अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु ऐरन ने विश्वविद्यालय में बिताए 18 महीनों को “देशभक्ति और राष्ट्र-निर्माण की भावना से ओत-प्रोत एक अविस्मरणीय यात्रा” बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न अकादमिक धाराओं से जुड़े साथियों के सहयोग ने इस छोटे लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल को एक सशक्त और प्रेरक अध्याय बना दिया।
कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण मूर्ति कार्यकारी अधिकारी रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय का संबोधन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि डॉ. हिमांशु ऐरन केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और संस्थान के लिए परिवर्तनकारी नेतृत्व रहे हैं। उन्होंने कहा, “डॉ. ऐरन ने जिस प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और राष्ट्रहित की भावना के साथ सुभारती को दिशा दी है, वह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत है। हम यह संकल्प लेते हैं कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सुभारती को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे।” आगे उन्होंने दृढ़ स्वर में आश्वस्त किया, “हम पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रयास करेंगे कि सुभारती को विश्व का नंबर एक संस्थान बनाने के उनके स्वप्न को साकार कर सकें।” उनके इस वक्तव्य ने पूरे सभागार में उत्साह और संकल्प की नई ऊर्जा का संचार कर दिया।
